ग्यारह सितंबर का दिन किस पर कितना भारी

कल ग्यारह सितंबर का दिन था। और इस दिन को तो पूरी दुनिया मे शायद ही कोई भूल सकता है। क्यूंकि ९/११ के नाम से अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मे हुए हादसे की याद आ जाती है जिसमे देखते ही देखते ट्विन टावर को हवाई जहाज से गिरा दिया गया था और जिसमे सैकड़ों लोगों की जान चली गयी थी। हालांकि इस हादसे को छे साल हो गए है पर अमेरिका को ये दिन अभी भी दहशत भरी यादों की याद दिलाता है।यूं तो आजकल हादसे आम व्यक्ति की जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे है ।

पर ग्यारह सितंबर का दिन ना केवल अमेरिका बल्कि उत्तर प्रदेश के लिए भी कुछ ऐसा ही दिन रहा जहाँ मायावती की सरकार ने मुलायम सिंह की सरकार द्वारा भर्ती ६५०० पुलिस जवानों की नियुक्ति को रद्ध कर दिया और १२ आई.पी.एस अफसरों को सस्पेंड कर दिया क्यूंकि ये १२ आई.पी.एस अफसर उन boards मे थे जिन्होंने इन पुलिस वालों का चयन कर उन्हें नियुक्त किया था। अब देखना ये है कि क्या मायावती इन पुलिस वालों की जगह फिर से भरती है या नही ?और अगर भर्ती करती है तो किस आधार पर। निष्पक्ष या फिर जातिवाद पर आधारित। या वो भी वही करेंगी जो मुलायम सिंह ने किया था ?

आजकल हैदराबाद मे एक-के बाद एक हादसे हो रहे है। कभी bomb blast तो कभी flyover का गिरना । और कल यानी ग्यारह सितंबर को एक ट्रेनर aircraft किरन हादसे का शिकार हो गया जिसमे दोनो ही पायलट की मृत्यु हो गयी जो की बहुत ही दुखदायी है।

इसी तरह बंगलोर मे बच्चों के मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल पर रोक लगाई गयी है। जो बच्चे १६ साल से छोटे है अब उनके लिए जो मे मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करना मना हो गया है ।क्यूंकि उनका मानना है मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल बच्चों कि सेहत के लिए ठीक नही है और साथ ही साथ कक्षा मे इससे अवरोध उत्पन्न होता है।सोचने वाली ये बात है कि अब ऐसी रोक लगाने के लिए भी सरकार को ही निर्णय लेना पड़ता है। क्या स्कूल और माँ-बाप की कोई जिम्मेदारी नही है.स्कूल में बच्चों को भला मोबाइल की ऐसी क्या जरुरत है ।ये तो अभिभावकों को सोचना चाहिऐ।

और चलते-चलते कल से twenty-20 की शुरुआत हो गयी है । अब देखना है कि चक दे इंडिया होता है या नही






Comments

ह्म्म, चक दे इंडिया के लिए शुभकामनाएं है टीम को!!

काफ़ी दिन बाद लिखा आपने !!
Gyandutt Pandey said…
बचपन में मंघाराम एण्ड संस के असॉर्टेड बिस्कुट के टिन आते थे. तरह तरह के अच्छे वाले बिस्कुट होते थे. यह पोस्ट असॉर्टेड विषयों वाली है! बढ़िया!
Udan Tashtari said…
कई मसले एक साथ-चलिये २०/२० की शुभकामनायें.
mamta said…
संजीत जी हम जरा छुट्टी मना रहे थे !
ज्ञानदत्त जी , समीर जी शुक्रिया !
yunus said…
भई कहां गायब थीं आप । पहले तो छुटिटयों में भी लिख लेती थीं

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