गोवा मे गणेश चतुर्थी

उत्तर भारत में तो हरतालिकातीज मनाई जाती है जिसका जिक्र ज्ञानदत्त जी ने अपनी पोस्ट मे किया था।और हम भी तीज करते है और इस दिन गुझिया ,मालपुआ वगैरा बनाते है और पतिदेव का खर्चा भी करवाते है। वैसे दिल्ली वगैरा मे खोया मिलने मे दिक्कत नही होती है पर यहां गणेश चतुर्थी की वजह से खोया मिलना जरा मुश्किल होता है। जहाँ उत्तर भारत मे महिलाएं तीज की खरीददारी मे व्यस्त थी वहीँ यहां गोवा मे लोग गणेश चतुर्थी की तैयारी मे लगे हुए थे।क्यूंकि गणेश चतुर्थी यहां का बड़ा त्यौहार माना जाता है।ज्यादातर लोग अपने घरों मे भी गणेश की स्थापना करते है। आप कहीँ भी जाएँ हर तरफ भीड़ क्या सब्जी मंडी क्या कपडे की दुकाने। बाजार मे हर तरफ रौनक दिख रही थी।और मिठाई की दुकानों मे तरह-तरह के लड्डू,मोदक बिक रहे थे

यहां पर गणेश चतुर्थी डेढ़ दिन से लेकर ग्यारह दिन तक मनाई जाती हैजो लोग घर मे गणपति की स्थापना करते है वो या तो डेढ़ दिन या पांच दिन मे मूर्ति का विसर्जन कर देते है। पर सार्वजनिक स्थलों पर होने वाली पूजा आम तौर पर नौ या ग्यारह दिन तक चलती है।वैसे margaon मे ज्यादा कैथोलिक रहते है पर फिर भी वहां भी गणेश चतुर्थी की ख़ूब धूम दिखाई देती है। ये दोनो फोटो margaon की ही है।








जहाँ भी गणेश जी की मूर्ति स्थापित करते है चाहे घर हो मंदिर हो या फिर कोई सार्वजनिक स्थल जैसे पार्क आदि मे हर जगह भगवान् की मूर्ति के ऊपर मातोली (maatollई) बाँधी जाती है। ये maatolli विभिन्न प्रकार के फल और सब्जियों से बनती है। । वैसे maatolli हमने पहली बार यहीं पर सुना और देखा है क्यूंकि दिल्ली वगैरा मे इतना ज्यादा देखने को नही मिलता है। इन फोटो मे आप maatolli मे बांधे जाने वाले फल वगैरा देख सकते है।
पंडालों मे तो पूरे समय गणेश स्तुति बजती रहती है साथ ही घुमत और तासों की आवाज माहौल को पूरी तरह से भक्तिमय कर देती है।

यहां पर तरह- तरह के गणेश देखने को मिलते है और हमे लगता है की ये शायद इको-फ़्रेंडली भी है।यूं तो गोवा मे हर जगह गणेश दिखते है पर यहां मार्सेल(marcel) नाम की जगह या यूं कहें की एक छोटे से गाँव मे आपको हर दस कदम की दूरी पर गणेश प्रतिमा के दर्शन होते है। marcel के लिए लोग कहते है की यहां हर घर मे गणेश स्थापित होते है और हर साल उनके नए-नए रुप देखने को मिलते है। ये नीचे जो फोटो आप देख रहे है ये marcel की ही है। तो चलिए कुछ अलग-अलग से गणेश जी की फोटो जो हमने यहां घूमते हुए खींची है आपके लिए प्रस्तुत है

जैसे ये वाले गणेश जी थर्माकोल से बने है। इनकी ऊंचाई करीब बीस फ़ीटहै
ये वाले स्पौंज से बने है। और इन्हें सब्जियों का आकर दिया गया है


ये
वाले गणेश जी बालू से बने हुए है



यहां तक की गणेश चतुर्थी मे पहले दो दिन तो अधिकतर दुकाने बंद ही रहती हैऔर कुछ तो पांच दिन तक बंद रहती हैआज के लिए बस इतना ही बाक़ी की कुछ और फोटो हम कल लगाएंगेक्यूंकि अब हम फिर से घूमने जो जा रहे है अरे मतलब गणेश उत्सव मनानेवो क्या है ना यहां बिल्कुल छुट्टी और उत्सव का माहौल रहता हैहर कोई छुट्टी के मूड मे रहता है वो चाहे कोई भी काम करता हो





Comments

बढ़िया विवरण!
शुक्रिया गोवा में गणेशोत्सव जानकारी देने के लिए!
Gyandutt Pandey said…
विनायक मेरे मनपसन्द देवता हैं. मुझे लगता है कि उनके रचयिता सबसे पहले कार्टूनिस्ट रहे होंगे. हमारे धर्म की विशेषता यही है कि ईश्वर सब रूपों में है और उनको गम्भीरता का व्यर्थ आवरण नहीं चाहिये.
लम्बोदर और वाहन चूहा - क्या कॉम्बिनेशन है! क्या रस है कल्पना में.

आपकी पोस्ट पढते हुये वही रस आया!
Sanjeeva Tiwari said…
ममता जी, धन्‍यवाद विघ्‍नविनायक की जानकारी उपलव्‍ध कराने के लिए ।
Udan Tashtari said…
ये आपने गोवा की गणेश चतुर्थी की अच्छी जानकारी दी.

चित्र भी अच्छे लगे.

आभार.
आपके प्रयास सराहनीय है और में अपने ब्लॉग पर आपका ब्लॉग लिंक कर दिया है।
रवीन्द्र प्रभात
मुझे आपके ऐसे लिख पढने में मजा आता है जिसमें किसी स्थान या शहर की जानकारी होती है।
दीपक भारतदीप
बुहत अच्छी पोस्ट के लिए बधाई।और आभार भी ।
फोटो गायब हो गई हैं ब्लॉग से.
mamta ji,
goa ke ganesh ji ka photo aur jankari achchhi lagi, badhai
prof. ashwini kesharwani

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