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आज साक्षरता दिवस है पर क्या हम ब्लॉगर साक्षर है ?

आज साक्षरता दिवस है । क्या साक्षरता का मतलब सिर्फ पढना लिखना ही आना है ।नहीं हमे ऐसा नहीं लगता है क्यूंकि हम सब पढ़े-लिखे जो अनपढ़ों की तरह व्यवहार करते है तो क्या हम लोगों को भी साक्षर होने की जरुरत नहीं है। पूरे देश मे जोर-शोर से साक्षरता दिवस मनाया जा रहा है। पर क्या आप लोगों को नहीं लगता है कि ब्लॉग जगत मे भी हम सभी को साक्षर होने की आश्यकता है । अब आप लोग कहेंगे कि कमाल है आप कैसी बात कर रही है अगर हम ब्लॉगर पढ़े-लिखे नहीं होते यानी कि साक्षर नहीं होते तो ब्लॉगिंग कैसे करते। अरे भाई साक्षर होने का मतलब ये तो नहीं होता है कि आप ने किसी को भी खासकर महिलाओं को कुछ भी कहने का अधिकार पा लिया है। ब्लॉगिंग का पिछले २ सालों का इतिहास देखा जाए तो जिस तरह से महिलाओं के लिए अपशब्द इस्तेमाल हुए है वो हमारे साक्षर होने का पुख्ता सबूत देते है । हिंदी ब्लॉगिंग के शुरूआती दिनों मे पुराने और जानकार लोग यही कोशिश कर रहे थे कि ज्यादा से ज्यादा लोग हिंदी मे ब्लॉगिंग शुरू करे और जिस तरह अंग्रेजी ब्लॉगिंग से लोग इतने बड़े पैमाने पर जुड़े है उसी तरह लोग हिंदी ब्लॉगिंग से भी जुड़े । और आज हिंदी ब्ल...

एक सुन्दर शाम मिनाक्षी और रचना के साथ

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अब यूँ तो दिल्ली मे मिनाक्षी और रचना से मिले हुए तकरीबन एक महीना हो गया है पर इस पर पोस्ट देर से लिख रहे है क्यूंकि दिल्ली मे रहते हुए कुछ ज्यादा व्यस्त हो गए थे और अब चूँकि हम ईटानगर आ गए है तो सोचा कि इस मुलाकात पर पोस्ट लिखी जाए । पिछले ३ साल से हम जब भी दिल्ली जाते है रचना और रंजना से से जरुर बात होती थी और मिलने का भी कई बार कार्यक्रम बना पर हम लोग कभी मिल नहीं पाए । हर बार कि तरह इस बार भी जब हम दिल्ली मे थे तो रचना और रंजना से बात की तो पता चला की रंजना तो दिल्ली से बाहर गयी हुई थी पर रचना से बात हुई तो पता चला की मिनाक्षी भी उन दिनों दिल्ली आई हुई थी । तो मिनाक्षी से भी बात हुई और मिलने का कार्यक्रम बना । और मिलने की जगह हमारा घर रक्खा गया और दोपहर बाद यानी ३ -४ बजे का रक्खा गया। पहले इसे ब्लॉगर मीट की तरह रखने की सोची गयी पर जिनके नंबर थे वो या तो busy थे या दि ल्ली से बाहर थे और बाकी लोगों से संपर्क नहीं हुआ। हाँ मनविंदर जी ने भी आने को कहा था पर उस दिन उन्हें कुछ काम आ गया था इसलिए वो नहीं आई थी। खैर हम तीनो ही पहली बार मिल रहे थे ये अलग बात है कि ब्लॉग ...

कॉमन वेल्थ गेम्स क्वींस बैटन रिले ( C W G queen's baton relay in itanagar)

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अब चाहे जितने भी scam हो कॉमन वेल्थ गेम्स को लेकर पर जिस भी राज्य मे क्वींस बैटन आती है वो पूरा राज्य जोश मे भर जाता है । अब जैसे जुलाई मे जब क्वींस बैटन यहां आई तो ऐसा ही कुछ अरुणाचल मे भी हुआ था । जैसा कि हम सभी को पता है कि इस साल ३ अक्तूबर से दिल्ली मे कॉम न वेल्थ गेम्स होने वाले है और इसके लिए लन्दन से क्वीन एलिजाबेथ 2 ने खिला ड़ियों के लिए स न्देश इस बैट न मे भेजा है और इस सन्देश को ३ अक्तूबर को दिल्ली मे खेलों के उदघाटन समारोह मे पढ़ा जाएगा । क्वीन के सन्देश के साथ इस बैटन ने २९ अक्टूबर २००९ मे बकिंघम पैलस से अपना सफ़र शुरू किया । ये बै टन ७० देशों और पूरे भारत वर्ष मे घूमने के बाद ३ अक्टूबर को दिल्ली पहुंचेगी । इस बैटन के साथ तकरीबन १० - १५ लोगों की टीम चलती है । इस टीम को जनरल कदी यान लीड कर रहे थे । इस बैटन की खासियत ये है कि...

ईटानगर मे स्वतंत्रता दिवस समारोह

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कल १५ अगस्त को सारे भारत वर्ष की तरह ईटानगर मे भी स्वतंत्रता दिवस काफी जोश से मनाया गया। हालाँकि यहां एक दिन पहले बारिश हुई थी जिसकी वजह से १५ अगस्त को मौसम काफी सुहावना था । हाँ थोड़ी - थोड़ी बूंदा - बादी हो रही थी पर उससे लोगों के जोश और उत्साह मे कोई कमी नहीं थी।क्यूंकि लो ग छाता लगाकर परेड देख रहे थे । सुबह - सुबह ६ जब हम लोग उठे तो देखा सर्किट हाउस मे ( हम अभी यही रह रहे है ) बड़ी चहल - पहल दिखी और छोटे - छोटे बच्चे तैयार होकर इकठ्ठा हो रहे थे पूछने पर पता चला कि सभी बच्चे झंडा फहराने के लिए इकठ्ठा हो रहे है। तो सर्किट हाउस वालों से पूछने पर पता चला कि सात बजे झंडा फहराया जायेगा। बस फिर हम अपना कैमरा लेकर तैयार हो गए फोटो खींचने के लिए। और ठीक ७ बजे सर्किट हाउस के जे . इ . ने झंडा फहराया और सभी ने राष्ट्रीय गान भी गाया और उसके बाद जे . इ . ने एक छोटा सा भाषण भी दिया और फिर बच्चों को लड्डू और रसगुल्ले बांटे गए ।...

सांसदों और विधायकों को टोल टैक्स देने की जरुरत क्यूँ नहीं ?

हमारे देश के सांसद और विधायक ऐसे है जो देश और जनता के लिए दावा तो कुछ भी करने का करते है पर उनकी जेब से कुछ जाए ये उन्हें मंजूर नहीं है। अरे आप को यकीन नहीं है पर ऐसा ही है। कल मंत्री मंडल की बैठक मे ये निर्णय लिया गया कि अब से सांसदों और विधायकों को टोल टैक्स नहीं देना पड़ेगा । अरे पर आखिर ऐसा फैसला लिया क्यूँ गया ? क्या आम जनता के पास इफरात धन-दौलत है और ये सांसद और विधायक टोल टैक्स देना भी afford नहीं कर सकते है। जबकि किसी भी राज्य या शहर मे देखे तो गाड़ियों पर अपनी पार्टी के झंडे लगाए ये फर्राटे से घूमते नजर आते है। जहाँ से भी जनता को लूटने का मौका मिल भर जाए , बस । जहाँ नेताओं को अपने लिए कुछ भी फैसला लेना होता तो फटाफट सर्व सम्मति से निर्णय ले लिए जाता है। पर सवाल ये है कि अगर ये सांसद और विधायक टोल टैक्स नहीं देंगे तो फिर आम जनता क्यूँ दे। क्या सारे तरह के टैक्स देने का जिम्मा सिर्फ आम जनता का ही है। ऐसा भला ये देश के लिए क्या कर रहे है जो इन्हें टोल टैक्स ना देने की छूट दे दी गयी है।

नबोग्रोह मंदिर (navagraha temple)

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आम तौर पर हम गौहाटी सिर्फ फ्लाईट से आने-जाने के लिए ही जाते है पर वहां रुकते नहीं थे। पर मई के शुरू मे हम ३-४ दिन के लिए गौहाटी गए थे तो जाहिर है कि जब ४ दिन रुकेंगे तो गौहाटी घूमेंगे भी। :) जब गेस्ट हाउस वाले से पूछा कि यहां क्या-क्या घूमने की जगह है तो एक सपाट सा उत्तर मिला कि कामख्या के अलावा तो ज्यादा कुछ नहीं है। मार्केट के बारे मे पूछने पर कहा कि बाजार बहुत दूर है । वो तो बाद मे पता चला कि बाजार सिर्फ १०-१२ कि.मी . दूर था जिसे वो लोग बहुत दूर कह रहे थे। खैर हम लोग के साथ जो सज्जन गए थे उनसे हम लोगों ने एक टूरिस्ट गाइड मंगवाई और गाईड देख कर पता चला कि जैसा लोग कहते है कि यहां कुछ घूमने के लिए नहीं है वो गलत है। सो हम लोगों ने गौहाटी के मंदिरों के साथ - साथ गौहाटी का स्टेट म्यू जी यम , आसाम ज़ू , गौहाटी के मार्केट देखने का कार्यक्रम बनाया ।और गाईड मे एक तरफ पड़ने वाली जगहों को देखने का पूरे दिन का प्रोग्राम बना। तो सबसे पहले नबोग्रोह मंदिर देखने का निश्चित हुआ और अगले दिन सुबह-सुबह ...

एक-दूसरे पर आक्षेप करना ही क्या ब्लॉगिंग है ?

कितने अफ़सोस की बात है कि हर कुछ दिन पर एक हंगामा होना ब्लॉग जगत का एक नियम सा बन गया है । हर बार हंगामा पिछले हंगामे से ज्यादा बड़ा होता है । कभी महिला ब्लॉगर तो कभी उनके द्वारा लिखे गए लेखों को लेकर हंगामा हो जाता है । और कल तो हद ही हो गयी । कल हमने कई दिन बाद जब ब्लॉग वाणी खोला तो हम कुछ चकरा से गए क्यूंकि कई पोस्टें समीर जी , ज्ञान जी और अनूप जी के नाम के साथ लिखी दिखी । और उन्हें पढ़कर अफ़सोस तो हुआ साथ ही बहुत दुःख भी हुआ । कि आखिर हम लोग किस तरह कि ब्लॉगिंग कर रहे है जिसमे एक - दूसरे पर कीचड उछालना क्या सही है । जब हमने २००७ मे ब्लॉगिंग शुरू की थी तब आज की तुलना मे ब्लोगर जरुर बहुत कम थे ( शायद ५०० - ६०० ) पर इस तरह का रवैया कभी एक - दूसरे के लिए नहीं देखा था । हाँ छोटी - मोटी नोक - झोक होती रहती थी जो ब्लॉगिंग और ब्लॉगर दोनों के लिए जरुरी और अच्छी होती थी । पर अब इस नोक - झोक का स्वरुप बद...