जापान और चीन का यात्रा विवरण

इस साल हम लोग मई में जापान और चीन घूमने गए थे तो सोचा वहाँ के अपने अनुभव आप लोगों के साथ बाटूँ । तो पहले हम जापान की बातों को साझा करेंगे । वैसे जापान जाने से पहले हम ने कुछ जापानी शब्द जो आम बोलचाल की भाषा में इस्तेमाल होते है उन्हें सीखा भी जैसे थैंक यू को जापानी में arigato कहते है और हेलो को konnichiwa और सॉरी को gomennasai और ऐसे ही कुछ और शब्द ,जिससे एक बिलकुल ही नए देश जहाँ की भाषा ना हम समझते है और ना वो लोग हमारी भाषा ,ताकि वहाँ ज़्यादा परेशानी ना हो , हालाँकि कुछ लोग इंग्लिश समझ जाते है पर उसके लिए बहुत ही धीरे धीरे एक एक शब्द को बोलना पड़ता है । :)

 
(ये फ़ोटो प्लेन से ली है )
वैसे जापानी लोग बहुत ही ख़ुशदिल,मददगार होते है अगर उनसे कहीं का पता या रास्ता पूछिए तो अगर जगह आस पास है तो वो वहाँ तक आपके साथ चलकर दिखाते है पर जो लोग सिर्फ़ जापानी समझते है उनके साथ कभी कभी उनको अपनी बात समझने में दिक़्क़त आती थी ।वैसे कुछ दुकानदार इंग्लिश समझ लेते है और कहीं का भी रास्ता या पता किसी दुकानदार से पूछना ही बेहतर होता है ।


(टोक्यो airport)
टोक्यो airport से टोक्यो शहर तक़रीबन 30 से 35 कि.मी. दूर है और airport से टोक्यो सिटी जाने के दो- तीन options है जैसे लेमोज़िन बसें, मेट्रो और टैक्सी । मेट्रो में अगर आपको पता ना हो तो बहुत कन्फ़्यूज़न हो जाता है और टैक्सी बहुत महँगी पड़ती है। पर उनकी लेमोज़िन बसें बहुत ही अच्छी ,आरामदायक और बिलकुल punctual होती है और डेढ़ घंटे में पहुँचा देती है ।


(टोक्यो शहर की झलक )
टोक्यो जाने के पहले हम लोगों ने काफ़ी रीसर्च किया था कि टोक्यो airport से अपने होटेल gracery जो कि shinjuku में था कैसे जाएँगे और सोचा था की उनकी मेट्रो लेंगे पर जब हम लोग टोक्यो पहुँचे तो सामने ही बस का काउंटर दिखा और हम लोगों ने बस का टिकट लिया और बस स्टॉप पर पहुँच गए क्यूँकि मेट्रो स्टेशन के लिए थोड़ा चलना था और लम्बी हवाई यात्रा के बाद इतनी एनर्जी नहीं थी इसलिए बस लेना बेहतर लगा। वहाँ पर हर काम इतना systematic तरीक़े से होता है कि बस कुछ पूछिए मत।


ख़ैर हम लोग अपने सामान के साथ जैसे ही बस स्टॉप पर पहुँचे तो वहाँ खड़े स्टाफ़ ने हमसे टिकट लिया और सामान पर स्लिप लगाई और जब बस आयी तो उन्होंने ही सारा सामान बस में चढ़ाया जिसकी हमें उम्मीद नहीं थी क्योंकि जब हम यूरोप घूमने गए थे तो वहाँ हर जगह बस में ख़ुद ही सामान चढ़ाना और उतारना पड़ता था । :(

जैसे ही बस चली तो एक आदमी प्लैकर्ड लेकर बस में चढ़ा जिस पर लिखा था की सीट बेल्ट लगा लीजिए ।और बस shinjuku के लिए चल पड़ी । :)














Comments

glowfriend said…
वाह क्या बात है आपने पहले बताय़ा होता तो हम भी साथ चलते।

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