Wednesday, June 27, 2007

जब हमने ब्लॉगिंग के तीन महीने नाम की एक पोस्ट लिखी थी तब शिरीष जी अपने कमेंट मे हमसे पूछा था की हमने ब्लॉगिंग कैसे शुरू की और क्या हमारे बेटे और पतिदेव भी ब्लॉग लिखते है। और अगर नही लिखते है तो हमे ब्लॉगिंग के बारे मे कैसे पता चला ? कई दिनों से हम लिखने की सोच रहे थे तो सोचा आज इस बारे मे लिख ही दिया जाये। तो सबसे पहले हम ये बता दे की ना तो हमारे बेटे और ना ही हमारे पतिदेव ब्लॉग लिखते है हाँ वो लोग हिंदी और इंग्लिश के ब्लॉग पढ़ते जरूर है।

हमने ब्लॉगिंग कैसे शुरू की इसके बारे मे तो हमने अपनी पिछली पोस्ट मे भी लिखा था पर हमे इसके बारे मे कैसे पता चला तो हुआ यूं की अगस्त २००६ से हम गोवा मे है और गोवा मे थोड़ी भाषा की समस्या होने से हमने कुछ ज्वाइन नही किया था वैसे भी हम पार्ट टाइम ही काम करते है। एक तो वहां भी दिन बहुत बड़ा होता है और जब घर मे सब लोग अपने -अपने कामों मे व्यस्त हो तो दिन भर कोई क्या करे। और दुसरे चुंकि हम वहां ज्यादा लोगों को जानते नही है इसलिये किसी के घर ज्यादा आना-जाना भी नही होता था। ऐसे मे समय बिताने के लिए हम टी.वी.देखते थे या कुछ पढ़ लेते थे। घर मे बेटे और पतिदेव कंप्यूटर पर हमेशा कुछ ना कुछ करते रहते थे और हमको कहते की देखो दुनिया कहॉ पहुंच रही है आज कल हर चीज बस एक क्लिक की दूरी पर है । कोई भी जानकारी लेनी हो तो गूगल पर मिल सकती है। कहने का मतलब की हर तरह से वो लोग चाहते थे की हम भी कंप्यूटर करना शुरू कर दे।

एक दिन यूं ही कंप्यूटर पर काम करते हुए पतिदेव बोले की ये देखो इस साईट पर हिंदी मे लिखा जा सकता है और पैसा भी कमाया जा सकता है। साईट का नाम तो समझ ही गए होंगे नही तो चलिये हम बताए देते है अरे ibibo.तो हिंदी साईट सुनकर हम भी खुश हो गए वो क्या है ना की अपनी इंग्लिश जरा कमजोर है मतलब की जो बात हम हिंदी मे पूरे भाव के साथ लिख सकते है उतना इंग्लिश मे नही . आख़िर हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा हैखैर तो हमने सोचा की चलो अगर लिखने के साथ-साथ कुछ कमाई भी हो जाये तो क्या बुरा है पर हमारा बड़ा बेटा हमसे सहमत नही था उसका कहना था की अगर आप को लिखना है तो और भी कई हिंदी की साईट है आप वहां लिखिए आप क्यों पैसे के चक्कर मे पड़ रही हैपर हम भी कहॉ मानने वाले थे ,हमने कहा की ट्राई करने मे क्या जाता हैहमने बेटे के साथ ही बैठकर ibibo पर अपने को रजिस्टर करवाया और शायद एक या दो पोस्ट ही लिखी थीपर ना तो कुछ अच्छा लगा और ना ही मजा आया इसलिये दो दिन बाद ही हमने लिखना बंद कर दियातो फिर हमने अपने बेटों के साथ बैठकर कुछ हिंदी की साईट देखी जैसे देसी पंडित पर उस समय तक हम नारद के बारे मे ज्यादा नही जानते थेपर उस समय हमे लगता था की सब लोग बहुत ही शुद्ध हिंदी माने की साहित्यिक भाषा का प्रयोग करते है तो भला हमारी ब्लोग कौन पढ़ेगा ?

हिंदी मे लिखना अब बहुत आसान हो गया हैएक बार करीब पांच -छे साल पहले हमने हिंदी मे लिखने की कोशिश की थी जब हिंदी के अक्षर वाले font चले थे जिसमे key board पर हिंदी वर्णमाला के अक्षर लगाए जाते थे पर उस मे लिखना टेढ़ी खीर जैसा थाखैर शुरू मे जब हमने ibibo पर लिखा था तो जरा मुश्किल लगता था क्यूंकि उस मे मोनो टाईप पैड होता था जिसे देख-देख कर हम लिखते थे और कई बार तो किसी-किसी शब्द पर अटक ही जाते थेजब हमने ब्लॉगिंग शुरू की तो इसमे भी पहले लिखने मे दिक्कत आती थी इसलिये शुरू की एक-दो पोस्ट हिंग्लिश मे हैपर बाद मे हिंदी मे लिखना शुरू कर दिया और अब तक लिखना जारी है




4 Comments:

  1. Udan Tashtari said...
    चलो, अब पता चल गया कि कैसे और क्यूँ शुरु किया. सर से एक बोझ सा उतर गया वरना हम तो सोच रहे थे कि इसके दोषी कहीं हम या हमारे मित्रों के ब्लॉग तो नहीं. :)
    Shrish said...
    श्रीश जी (शिरीष जी नहीं) के प्रश्न का जवाब देने केल लिए धन्यवाद! हमें से कई लोग ऐसे ही संयोगवश हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया से जुड़े हैं।

    लिखते रहिए हम पढ़ते रहेंगे, विचारों को औरों तक पहुँचाने का ब्लॉगिंग से बेहतर जरिया नहीं।
    mamta said...
    श्रीश जी नाम गलत लिखने के लिए माफ़ी चाहते है।
    manoj said...
    शब्दों की ताकत क्या कहिये. हालाँकि आपकी इस बात से कइयों, खासकर भाषाविज्ञानियों, को असहमति हो सकती है आज कल हिंदी मे ब्लोग्गिंग करने के लिए एक अच्छा मौक़ा हे
    quillpad.in/hindi से हिंदी मे आसान से लिख सकते है

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