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बर्तनों का शॉवर 😄( अनलॉक ३.० )

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क्या हुआ ? चौंक गए शीर्षक पढ़कर ।😜 अरे सच में हमने अपने बर्तनों के लिए शॉवर मंगाया है । बड़ा ही अच्छा और क्यूट सा है । क्या यकीन नहीं आ रहा है । इसे देखिए और बताइए की हमारे बर्तनों का शॉवर क्यूट है या नहीं ।😍  

आसमानी ऊँचाई पर डीज़ल पेट्रोल के दाम क्यूँ ( अनलॉक ३.० )

जब पहला लॉकडाउन शुरू हुआ था उस समय डीज़ल का दाम शायद पैंसठ या सत्तर ऐसा ही कुछ था पर आजकल तो अस्सी रूपये से भी ज़्यादा हो गया है । जबकि डीज़ल को हमेशा सस्ता माना जाता रहा है क्योंकि डीज़ल कारों के साथ साथ कमरशियल वाहनों जैसे ट्रक ,टेम्पो वग़ैरा में तो डीज़ल ही इस्तेमाल होता है । और डीज़ल हमेशा पेट्रोल से सस्ता भी होता था पर आजकल हालात बदल गये है । डीज़ल पेट्रोल से महँगा हो गया है । अजीब बात है पर आजकल कुछ भी हो सकता है । फिलहाल तो बढ़ी हुई क़ीमत का हम लोगों पर ज़्यादा असर नहीं है क्योंकि आजकल कोरोना के चलते हम लोग तो घर में ही है इसलिये आजकल कार बहुत कम चलती है वरना अगर पहले की तरह ही घूमते फिरते होते तब इस बढ़ी हुई क़ीमत का असर हम पर भी शायद कुछ होता । खैर हम पर तो नही पर इतनी बढ़ी हुई क़ीमत का असर दूसरे लोगों जैसे ट्रक और टैम्पो चलाने वालों पर तो बहुत ही पड़ रहा होगा । क्योंकि एक तो पहले ही लॉकडाउन ने सब गड़बड़ कर रखा है उस पर पेट्रोल और डीज़ल की रोज क़ीमत बढ जाती है । इस पूरे जून के महीने में रोज कभी दस पैसा तो कभी पन्द्रह पैसे कर कर के पेट्रोल डीज़ल के दाम सरकारें बढ़ा...

बादलों को भी कोरोना से डर लगता है (अनलॉक ३.० )

पिछले कई दिनों से रोज सुबह शाम बादल छा जाते है पर नतीजा वही सिफ़र मतलब नो बारिश । 😊 हमें तो लगता है जब बादल दिल्ली पर छाते है तभी इन्द्र देव बादलों से पूछते है कि अभी तुम कहाँ हो । और जैसे ही बादल कहते है कि हम दिल्ली पर छाये हुये है । तो इन्द्र देव कहते है कि फ़ौरन दिल्ली से निकलो । पर क्यूँ भगवन । तो इन्द्र देव कहते है क्या तुम्हें पता नहीं है कि वहाँ कोरोना फैला हुआ है । अब हम तो यहाँ आ गये है भगवन । अच्छा तो जरा सी झींसी करके निकल लो । 🌨 तो उसके बाद हम कहाँ जायें भगवन ? कहाँ बरसें । कहीं भी जाओ , नोयडा जाओ ,ग़ाज़ियाबाद जाओ ,राजस्थान जाओ और नहीं तो इलाहाबाद और लखनऊ और नहीं तो मुम्बई ही जाकर बरसो । और दिल्ली पर छाये बादल इन्द्र देव की बात मानकर कुछ बूँदें गिराकर दिल्ली से उड़ जाते है । 💦

मुबारक हो तीन महीने हो गये ( अनलॉक ३.० )

हम सबको आत्म निर्भर बने हुये पूरे तीन महीने हो चुके है । बिलकुल प्रेगनेंसी टाइप वाली फीलिंग आ रही है ना । 😜 शुरू शुरू में कुछ परेशानियाँ और तीन महीने बीतते बीतते सब कुछ सैटल सा हो रहा है । 😁 अब विदेश में तो लोग अपना हर काम स्वयं ही करते है पर अपने देश में ये कामवाली और हैल्पर की जो सहूलियत हम लोगों को थी वो भी इस कोरोना ने छीन ली । 😬 हम लोगों ने हमेशा कामवाली हैल्पर और सेवक को अपने घरों में काम करते देखा है पर अब तो हम लोग ही फ़ुल टाइम सेवक टाइप हो गये है । पर इन तीन महीनों में हम ने बहुत कुछ सीखा और समझा है । पहली बात तो आत्म निर्भर होने की है जो हमने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि हम कभी इतने आत्म निर्भर बन सकते है और बन जायेंगें । पर कोरोना ने वो भी बना दिया । अपना तो ये हाल था कि अगर पार्वती एक दिन छुट्टी कर ले तो ना तो हम काम करते थे और ना ही घर में कोई हमें करने देता था । 🤓 बाहर का खाना जो हमारे यहाँ जब तब आता था अब पिछले तीन महीने से बंद है और हम हर तरह का खाना बनाने में हाथ आज़मा रहें है । 😛 वैसे पार्वती या कोमल तो नहीं है पर फिर भी हमारी मदद के लिये...

बोर्ड की परीक्षायें रद्द कर दी गई है ( अनलॉक ३.० )

वैसे ये ख़बर तो कल ही आ गई थी । हालाँकि पिछले कुछ दिनों से थोड़ी असमंजस की स्थिति सी भी थी । कभी होता था कि इम्तिहान जुलाई में होगें तो कभी कोई तारीख़ एनाउंस करते थे कि फ़लाँ तारीख़ से बोर्ड की परीक्षा हो सकती है । पर खैर अब ये निश्चित हो गया है कि बोर्ड के इम्तिहान नहीं होंगे । इम्तिहान ना होने की ख़बर से बच्चों को और उनके माता पिता को जरूर बडी राहत मिली होगी । क्योंकि इस कोरोना के माहौल में स्कूल , पढ़ाई और इम्तिहान से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है कोरोना से सुरक्षा । वैसे कुछ राज्यों को बच्चों के इम्तिहान ज़्यादा ज़रूरी लग रहें है और वहाँ परीक्षायें भी हो रही है । पता नहीं क्यूँ । वैसे जहाँ कुछ बच्चे बोर्ड के इम्तिहान ना होने पर शायद ख़ुश होंगें तो वहीं कुछ बच्चे शायद अपसेट भी होगें क्योंकि उन्हें फ़ुल मार्कस शायद नहीं मिल पायेंगें । ऐसा हम इसलिये कह रहें है क्योंकि हमारी एक फ्रैंड है जिनका नाती बारहवीं क्लास में है और इम्तिहान ना होने की ख़बर पाकर थोडा अपसेट हो गया क्योंकि अब वो कम्प्यूटर में फ़ुल नम्बर ( १०० ) नहीं ला पायेगा । क्योंकि अब तो इम्तिहान ही कैंसिल हो गया है । ...

जब ख़ुद पर आई तो ( अनलॉक ३.० )

आजकल पूरे देश मे कोरोना बढने की रफ़्तार दिन पर दिन तेज़ ही होती जा रही है । जहाँ आम लोगों को कवैरंटीन सेंटर और हॉस्पिटल पहुँचना और इलाज में आने वाली परेशानियों को हम सब रोज देख सुन और पढ़ रहे है । आम लोगों को जहाँ सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने के बारे में बडी बडी बातें सब करते है कि वहाँ हर तरह की सुविधाये मरीज़ों के लिये उपलब्ध है वग़ैरा वग़ैरा । वैसे डाक्टर, नर्सें , हॉस्पिटल स्टाफ़ सब भरसक कोशिश करते है और बहुत ही ज़्यादा काम कर रहें है ताकि मरीज़ों का सही तरीक़े से इलाज हो सके । और मरीज़ ठीक भी होते है । अभी तक तो साधारण लोग मतलब आम आदमी इसकी चपेट में आ रहा था । पर अब कुछ नेताओं को भी इस कोरोना ने पकड़ना शुरू कर दिया है । और ये सारे नेता वो चाहे किसी भी पार्टी के हों , सब सरकारी अस्पताल ना जाकर सीधे मैक्स हॉस्पिटल में भरती होते है । और तो और बाहर से भी नेता गण आकर मैक्स में एडमिट होकर इलाज करवा रहें है । क्योंकि दिल्ली में मैक्स में फिलहाल कोरोना का सबसे अच्छा और सही इलाज हो रहा है । तो भला नेता लोग कहीं और क्यूँ जायेंगें । ठीक है जो सक्षम है ,ओहदे से और पैसे से वो...

गूगल बाबा पर ज़्यादा भरोसा 🤓 ( अनलॉक ३.० ) पहला दिन

अभी कल ही की बात है हमारे बेटे ने पूछा कि फ़लाँ काम को कैसे करें । तो हमने जब बताया तो उन्हें यक़ीन नहीं हुआ और उसने फ़ौरन नेट पर सर्च किया और थोड़ी देर बाद आकर हमसे बोला कि हाँ मॉम आप सही कह रही थी । अब क्या करें आजकल गूगल बाबा पर सबक़ो ज़्यादा ही भरोसा है । और हो भी क्यों ना क्योंकि गूगल बाबा के पास हर सवाल का जवाब जो होता है । 😜 तो हमने उससे कहा कि आज तो हमें नानी की कही बात यानि मुहावरा याद आ गया । हमारी मम्मी आम बोलचाल की भाषा में भी खूब मुहावरे बोला करती थी । और हर बात के लिये उनके पास कोई ना कोई मुहावरा होता ही था । 😁 हांलांकि हम मुहावरों का बिलकुल भी इस्तेमाल नहीं करते है । पर कभी कभी जब कुछ ऐसी बात हो जाती है तो अनायास ही मम्मी वाले मुहावरे बोल देते है । 😛