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फिसड्डी से नंबर वन

आजकल हम इलाहाबाद आये हुए है अपने मायके पापा के पास। और हां आप लोग बिल्कुल भी confuse मत होइये कि हम इलाहाबाद कैसे पहुंच गए दिल्ली से एक हफ्ते के लिए हम यहाँ पापा और भैया के पास आये हुए है और ये पोस्ट हम इलाहाबाद से ही लिख रहे है । हमारे पापा भी हमारी तरह ही बहुत ज्यादा कंप्यूटर सेवी नही है इसलिये उन्होने हमारे ब्लोग को पढा ही नही था तो कल सुबह हमने उन्हें अपना ब्लोग पढ़ाया और उन्हें पढ़कर अच्छा भी लगा और ये जो टाइटिल आप ने ऊपर पढा है वो उन्ही का दिया हुआ है। तो अब इस के पीछे की कहानी भी बता देते है। दरअसल हम जब स्कूल मे पढ़ते थे तो हम पढने के सिवा हर काम करते थे वो चाहे बाटिक पेंटिंग सीखना हो या चाहे badminton खेलना हो या कुछ और कहने का मतलब पढाई से तो कोसों दूर रहते थे जिसकी वजह से सभी को लगता था कि अबकी तो ममता गयी पर हम पर हर बार भगवान् कुछ कृपा कर देते थे और हम पास भी हो जाते थे। और जब हम दसवी मे थे उस समय हमारे सिवा घर मे सभी को टेंशन था की हम पास होंगे या नही और सबसे बड़ी गड़बड़ ये थी की उन्ही दिनों हमारे मामाजी के बेटे की शादी पड़...

मैं चोर हूँ.

ये कोई पिक्चर का टाइटिल नही है और ना ही अमिताभ बच्चन की पिक्चर से लिया गया है , ये तो कल रात आज तक न्यूज़ चैनल पर एक खबर दिखाई गयी थी जो उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले की थी जिसमे दो दस और बारह साल के बच्चों के पेट पर मैं चोर हूँ लिखा गया और उनके कपडे उतार कर सड़कों पर घुमाया जा रहा था । पर उन बच्चों को किसी ने भी बचाने की कोशिश नही की । हां कुछ लोग और शायद रिपोर्टर्स उन बच्चों की फोटो खीचते हुए दिख रहे थे पर क्या सिर्फ फोटो खींच कर अखबार या टी . वी . पर दिखाना ही उनका मकसद होता है ? क्या वो लोग उन बच्चों को इस तरह घुमाये जाने से रोक नही सकते थे ? कोई बी . एस . पी . के कोर्पोरेटर को दिखाया गया था ताम्बे के तार चोरी करने की ये सजा उन दो बच्चों को दी गयी थी । जैसा की न्यूज़ मे दिखाया गया की पहले उन बच्चों को करंट लगाया गया और फिर उनके कपडे उतार कर उनके पेट पर मैं चोर हूँ ये लिख दिया गया और फिर उतनी तपती धूप ...

टेस्टिंग,टेस्टिंग

ये टेस्टिंग पोस्ट है।

रैली दे गोवा

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जैसा की सभी जानते है की गोवा एक बहुत ही अच्छी जगह है और वहां हमेशा कुछ ना कुछ होता ही रहता है। ऐसा नही है की बाक़ी जगहों पर कुछ नही होता पर जैसे जब हम दिल्ली मे थे तो दूरी की वजह से कई बार हम लोग इवेंट देखने नही जा पाते थे पर गोवा चुंकि छोटी जगह है और दूरियां ज्यादा नही है इसलिये आसानी होती है कहीं भी आने-जाने मे। अब दिल्ली मे भी विंटेज कार रैली होती थी पर हर बार जाना संभव नही होता था। शायद एक बार देखा है । रैली की शुरुआत मे पुलिस बैंड हमारे लिए तो ये पहला अनुभव था किसी भी कार रैली को देखने का । इससे पहले तो सिर्फ टी.वी.मे ही कार रैली देखी थी। पर सामने देखने का रोमांच ही कुछ और होता है। वैसे ये कार रैली november २००६ मे हुई थी जहाँ पर भारत के हर प्रांत के लोग इस कार रैली मे हिस्सा लेने आये थे।इस रैली का फ्लैग ऑफ़ गोवा के मुख्य सचिव न किया था और इसमे करीब ४०-५० गाडियां जैसे मारुति एस्टीम,मारुति जिप्सी, फोर्ड फिएस्ता , मित्सुबुशी लान्सर आदि गाडियां थी। सभी गाड़ियों अलग-अलग रंगों मे थी कोई एम . आर . एफ . के लाल रंग मे तो कोई जे . के . टायर के पीले र...

डी एडिक्शन कैंप

अपडेट : हम माफ़ी चाहते है कि हमने पोस्ट लिखते हुए year नही लिखा था । दर असल हम अंडमान मे २००३ से २००६ तक रहे थे । अंडमान मे रहते हुए भी हमे वही समस्या आयी की जब पतिदेव और बेटा स्कूल चले जाते थे तो हम क्या करें। और इसी लिए हमने वहां पता करना शुरू किया की हम किस तरह का जॉब ले सकते है क्यूंकि हम पार्ट टाइम् जॉब करना ही पसंद करते है। अब चाहे इसे हमारा आलसी पन कहिये या चाहे कुछ और। १५ अगस्त २००३ को वहां पर शाम को एल.जी अपने घर पर सबको चाय पर बुलाते है वही पर हमारी मुलाकात एक महिला से हुई जो की सोशल वर्क से जुडी थी और वही उनसे बात चीत मे पता चला की डी एडिक्शन कैंप शुरू हो रहा है और हम उसे ज्वाइन कर ले। पहले तो हमने सोचा कि हम ना करें क्यूंकि शराब पीने वालों से बात करना कोई आसान काम नही है और हमे डर भी लगता था और दुसरे अंडमान इतनी छोटी जगह है कि आपको लोग कहीं भी मिल सकते है और आपके घर तक भी आ सकते है । पर फिर ये भी ख़्याल आया कि अगर हमारी मदद से किसी का घर बन सकता है तो हमे इस challange को स्वीकार करना चाहिऐ। challange इसलिये क्यूंकि इससे पहले हमने ऐसा काम कि...

उफ़ ये रीमिक्स

वैसे रीमिक्स का चलन कई साल पहले शुरू हो गया था पर आज कल तो कोई भी गाना हो चाहे नया या पुराना हर गाने का रीमिक्स सुनने और देखने को मिल जाएगा। पुराने गानों की तो ऐसी मटियामेट करते है की समझ नही आता की ऐसे रीमिक्स गाने बनाने वालों का करना चाहिऐ। एक से एक अच्छे गानों का जो बुरा हाल करते है की बस पूछिये मत। और उस पर डान्स ऐसा की जिसका कोई जवाब ही नही। आज कल तो कोई भी गाना हो डान्स एक ही स्टाइल का होता है। कई बार m.t.v.पर भी ऐसे गाने दिखाए जाते है। सबसे पहले पर्दा है पर्दा से शुरुआत हुई या शायद उससे भी पहले क्यूंकि गुलशन कुमार के ज़माने से ये चल रहा है शुरू मे तो फिर भी थोडा बहुत गाने की इज्जत की जाती थी पर अब तो भगवन बचाए। मिसाल के तौर पर हम कुछ गानों का जिक्र यहाँ करना चाहेंगे - १.एक लडकी को देखा तो ऐसा लगा। २.बदन पे सितारे लपेटे हुए। ३.हम तो मुहब्बत करेगा। और ऐसे ही अनेकों गाने जो गायकों के गाने के अंदाज से जाने जाते थे वो आज की पीढ़ी के लिए अब ऐसे बेद्गंगे डान्स की बदौलत जाने जाते है। अरे अगर डान्स विडियो बनाना ही है तो कुछ नया तो करो। आज के ये रीमिक्स गाने वाले मेहनत तो करना ही नही ...

ब्लोगिंग के तीन महीने

आज पूरे तीन महीने हो गए है हमे ब्लोगिंग करते हुए ,हो सकता है आप लोगों को लगे कि भाई ये भी कोई इतनी बड़ी बात है की इस पर एक पोस्ट ही लिख दी जाये। तो जनाब हमारे जैसे इन्सान के लिए तो ये बहुत ही बड़ी बात है क्यूंकि ब्लोगिंग करने से पहले हमे कंप्यूटर पर काम करना बिल्कुल भी पसंद नही था या यूं कह लीजिये की हम बिल्कुल भी कंप्यूटर सेवी नही थे। हमारे घर मे बेटे और पतिदेव तो हमेशा ही कंप्यूटर पर काम करते थे। बेटे तो जब देखो तो कंप्यूटर पर और कुछ पूछो तो एक ही जवाब की नेट पर है कभी download चल रहा है तो कभी कोई पिक्चर देख रहे है । और तो और हमे भी कहते मम्मी आप भी नेट किया करिये इससे आप कोई भी जानकारी ले सकती है कुछ भी पढ़ सकती है। १० साल पहले हमने ई.ग.न.उ। मे कंप्यूटर कोर्स भी ज्वाइन किया था पर कुछ दिन जाने के बाद छोड़ दिया क्यूंकि एक तो उसमे क्लास शनिवार और रविवार होती थी और वो दिन छुट्टी का होता था इसलिये ४-५ क्लास के बाद उसे छोड़ दिया था।और दुसरे हम बहुत देर तक कंप्यूटर पर काम नही कर पाते थे क्यूंकि आंखों पर जोर सा पड़ता था ,वैसे ये मात्र एक बहाना ही था । फिर कुछ साल बाद बेटों और प...