Friday, June 26, 2009
अप्रैल मे जब दिल्ली गए थे तो शुरू मे तो कुछ सोचने समझने की सुध ही नही थी क्यूंकि पापा हॉस्पिटल मे थे पर जब कुछ दिन बाद उनकी तबियत कुछ संभली तो एक दिन हमने रचना को फ़ोन किया तो रचना ने सबसे पहले यही पूछा कि हम कब दिल्ली आ रहे है और ये बताने पर कि हम दिल्ली मे ही है रचना काफ़ी खुश हो गई कि इस बार तो हम लोग जरुर ही मिलेंगे । पर जब हमने पापा के बारे मे बताया तो रचना ने कहा कि कभी भी कोई भी भी हो तो हम उन्हें जरुर बताये । रचना का इतना कहना ही बहुत था ।
रचना से बात करने के बाद हमने रंजना जी को फ़ोन किया तो पता चला कि रंजना जी कुछ busy थी इसलिए उनसे बात नही हो पायी थी ।इस बीच मे २-३ बार रचना से बात हुई और हर बार बात इस पर ख़तम होती की इस बार तो हम लोग जरुर मिलेंगे । इलाहाबाद मे जब हम थे तब रचना ने बताया था कि अविनाश वाचस्पति जी ४ जून को दिल्ली मे एक ब्लॉगर मीट रख रहे है और अविनाश जी से भी बात हुई थी पर बाद मे वो मीट कैंसिल हो गई थी और फ़िर सन्डे को हम कुछ ऐसे उलझे रहे की न तो रचना और न ही अविनाश जी से बात कर पाये । दिल्ली से गोवा आने के पहले एक बार फ़िर रंजना और रचना से फ़ोन पर बात हुई पर मुलाकात नही हो पायी थी ।
और फ़िर जब पापा को हॉस्पिटल से छुट्टी मिली तो हम लोग इलाहाबाद चले गए । २-३ दिन बाद हमने सोचा की दिल्ली मे तो परेशानी की वजह से किसी से मुलाकात नही हुई और अब जब पापा ठीक है और हम इलाहाबाद मे है तो क्यूँ न इस बार इलाहाबाद के bloggers से मिल लिया जाए । अब ये सोचना तो बहुत आसान था पर मुश्किल ये थी की हमारे पास किसी का भी फ़ोन नंबर नही था । खैर तो हमने जिन लोगों को जानते थे की वो इलाहाबाद के है जैसे महाशक्ति ,हर्ष वर्धन और ज्ञानदत्त जी के ब्लॉग चेक किए और प्रोफाइल भी देखा की शायद वहां फ़ोन नंबर लिखा हो क्यूंकि अब बहुत से ब्लॉगर फ़ोन नंबर अपने ब्लॉग पर लिखते है न ।
पर किसी का भी फ़ोन नंबर नही मिला तो फ़िर हमने किसी से भी मिलने का विचार छोड़ दिया था पर अगले दिन फ़िर सोचा की और तो किसी का नही पर ज्ञान जी का फ़ोन नंबर शायद डाइरेक्ट्री मे मिल जाए पर उसमे नंबर न होने पर इनक्वरी से पता किया और जब ज्ञान जी को हमने कॉल किया तो वो शायद कुछ शॉक मे आ गए थे :) क्यूंकि उन्हें उम्मीद नही होगी की हम उन्हें कॉल करेंगे और वो भी यूँ अचानक । और फ़ोन करने के बाद हमें भी समझ नही आया की क्या बात करें ।तो हमने उनसे और दूसरे इलाहाबाद के bloggers का नंबर पूछा तो उन्होंने सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी का नंबर दिया ।
सिद्धार्थ जी को फ़ोन किया तो जैसे ही उनको हमने अपना परिचय दिया वो बड़े खुश हुए और साथ ही अफ़सोस भी जाहिर किया कि वो हमसे मिल नही पायेंगे क्यूंकि उन्होंने बताया की वो अपने गाँव जा रहे है अपने बेटे का मुंडन करवाने और कुछ दिन बाद लौटेंगे । और सिद्धार्थ जी कहने लगे की अगर एक दिन पहले हमने फ़ोन किया होता तो शायद मुलाकात हो जाती पर खैर अगली बार सही । फ़िर उन्होंने महाशक्ति प्रमेन्द्र का नंबर दिया पर प्रमेन्द्र से बात नही हो पायी ।
अगले दिन शाम को हम सिविल लाईन्स जाने का कार्यक्रम बना रहे थे और दूसरे कमरे मे थे कि तभी एक फ़ोन आया तो भइया ने उठाया और उनकी बात हुई । जब हम पापा के कमरे मे आए तो भइया ने बताया कि ज्ञानदत्त जी का फ़ोन आया था और वो घर का पता पूछ रहे थे तो भइया ने उन्हें घर का address बता दिया है । साथ ही भइया और पापा ने पूछा कि ये कौन है तो हमने उन्हें बताया कि ज्ञान जी एक ब्लॉगर है और वो भी हिन्दी मे ब्लॉग लिखते है ।
खैर ५-१० मिनट बाद ज्ञान जी का फ़िर फ़ोन आया address पूछने के लिए और फ़िर थोडी देर मे ज्ञान जी और रीता भाभी हमारे घर आए । और फ़िर थोडी formal बातचीत के बाद रीता भाभी से जो बात शुरू हुई तो ऐसा नही लगा कि हम दोनों पहली बार मिल रहे है ।काफ़ी बातें हुई ब्लॉग जगत की और bloggers की और घर बार की बातें भी हुई । हाँ ज्ञान जी से बात कम हुई पर अब हमें उम्मीद है कि ज्ञान जी का हमारे बारे मे भ्रम टूट गया होगा (age का ) :)
खैर तो ये थी हमारी इलाहाबाद की पहली ब्लॉगर मीट ।
Labels: allahabad, blogger meet, delhi, इलाहाबाद, दिल्ली, ब्लॉगर मीट
Wednesday, June 24, 2009
शायद अब रेलवे ट्रैक को शोर्टकट के रूप मे इस्तेमाल करना बंद हो जाएगा
14 comments Posted by mamta at 12:47 PMआज अखबार मे ये ख़बर पढ़ी थी जिसमे मुंबई की रेलवे कोर्ट ने एक मेडिकल रिप्रेजनटेटिव को रेलवे ट्रैक क्रॉस करने के कारण जेल भेज दिया था । पूरी ख़बर आप भी यहाँ पढ़ सकते है ।
वैसे रेलवे ट्रैक क्रॉस करने का नजारा हर शहर के प्लेटफोर्म पर देखा जा सकता है जहाँ न केवल लड़के और आदमी और आरतें बल्कि कई बार तो लोग सपरिवार बेधड़क रेलवे ट्रैक को एक प्लेटफोर्म से दूसरे प्लेटफोर्म पर जाने के लिए इस्तेमाल करते है । और कोई उन्हें ऐसा करने से रोक भी नही सकता था पर अब जब रेलवे पुलिस इस तरह लोगों को पकडेगी और कोर्ट उन्हें सबक सिखाने के लिए २-४ दिन के लिए जब जेल भेजेगी तब ही लोगों की इस तरह से रेलवे ट्रैक क्रॉस करने की आदत छूटेगी । ऐसी उम्मीद की जा सकती है ।
पता नही इस तरह के शोर्टकट से वो कितना समय बचा लेते है । बमुश्किल ५-१० मिनट ,पर उसके लिए अपनी जान जोखिम मे डालने से भी नही चूकते है ।
Labels: मुंबई, रेलवे कोर्ट, रेलवे ट्रैक, रेलवे पुलिस
Friday, June 12, 2009
आज बड़े दिनों बाद जब मेल बॉक्स देखा तो अल्पना जी का मैसेज पढ़ा तो सोचा की आज एक छुटकी सी पोस्ट लिख ही दी जाए । अल्पना जी हमारे गायब होने पर हमारी खोज ख़बर लेने का शुक्रिया । दरअसल कुछ परेशानी के चलते अप्रैल से जून तक हम दिल्ली और इलाहाबाद मे थे और उस बीच मे नेट करने का बिल्कुल भी समय नही मिला था । पर अब हम वापिस गोवा आ गए है और अब २-४ दिन मे पूरी तरह से ब्लॉग पढने और लिखने का काम शुरू कर देंगे । :)





