पारदर्शी मेढक

भाई इसे कहते है विज्ञान की तरक्की। क्या कभी किसी ने सपने मे भी सोचा था की कभी पारदर्शी मेढक भी होगा। हम तो हमेशा से मोटी खाल वाला भूरा -हरा सा मेढक देखते आये है। पर आज के समय मे कुछ भी असंभव नही है फिर भला पारदर्शी मेढक होना भी कहॉ असंभव है।जो दुनिया मे कोई सोच नही सकता उसे जापानियों ने कर दिखाया।

पारदर्शी मेढक बनाने जैसा अनूठा कारनामा जापान के शोध कर्ता मसयुकी सुमिदा (masayuki sumida) ने कर दिया है। और ऐसे पारदर्शी मेढक क्यों बनाए तो इसके लिए उनका कहना है की जो विद्यार्थी जीव विज्ञान पढते है और जिन्हे जीवों मे विभिन्न ओर्गंस को समझने के लिए मेढक का dissection करना पड़ता है क्यूंकि स्कूल मे dissection की शरुआत मेढक और केंचुए से ही कराई जाती है ।


अब कम से कम जापान मे मेढक को चीर-फाड़ करने की जरुरत नही है क्यूंकि अब उसकी ऊपर की खाल इतनी पतली है की अगर उसे लाइट के सामने रखे तो उसके शरीर के सारे ओर्गंस देखे जा सकते है। और ये भी देखा जा सकता है की किस तरह के बदलाव इन tadpoles मे आते है जब ये मेढक बनते है। जिससे मेढक के ओर्गंस को समझना भी आसान और शायद कुछ हद तक दिलचस्प भी होगा।

काश तीस साल पहले ऐसे मेढक होते तो हमारी दीदी को अपनी जीव विज्ञान की क्लास के लिए ब्रिजवासी (हम लोगों का सेवक)को हर समय मेढक पकड़ने के लिए दौड़ना ना पड़ता। :)

Comments

Gyandutt Pandey said…
अरे वाह! आदमी भी ऐसे पारदर्शी होने लगे तो मजा आ जायेगा. हीरो फिल्म में गाना गाते दिल दिखा कर कहेगा - देखो कैसा धड़क रहा है दिल! और कैमरा पारदर्शी आदमी में दिल पर फोकस हो जायेगा!
हनुमानजी को सीना चीर कर नहीं दिखाना होता कि राम-सीता उनके दिल में हैं; अगर वे पारदर्शी होते. :)
वाह क्या जानकारी है। बहुत अच्छी है।
दीपक भारतदीप
Manish said…
वाकई ये बहुत उपयोगी होगा उन विद्यार्थियों के लिए जो dissection के नाम से ही घबरा जाते थे।
रोचक समाचार है, परन्तु फोटो देखते समय इतना भी पारदर्शक नहीं लग रहा कि उसे बिना चीरफाड़ किये ही समझा जा सके।
Udan Tashtari said…
जी, कल ही टीवी पर देख रहा था इस प्रोग्राम को. आपने बड़ी रोचकता से पेश कर दिया.
Dard Hindustani said…
जानकारी भी अच्छी है और ज्ञान जी की टिप्पणी भी।

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