Monday, July 24, 2017




Shinjuku टोक्यो शहर का entertainment hub है । ये जगह सुबह बिलकुल शांत और अलग दिखती है पर जैसे जैसे शाम होने लगती है इस इलाक़े की शक्ल और माहौल बिलकुल बदल जाता है और ये यक़ीन नहीं होता है कि ये वही shinjuku है।



जापान आने से पहले जब हमने यहाँ घूमने की जगहें ढूँढी थी तो पाया कि रोबोट रेस्टौरेंट के बारे में काफ़ी कुछ लिखा था कि इससे ज़रूर देखना चाहिए क्यूँकि ये अपने आप में बिलकुल ही अलग तरह का रेस्टौरेंट है जहाँ छोटे बड़े रोबोट और इंसान एक साथ डान्स करते है। इस में लाइट साउंड और डान्स के द्वारा एक स्टोरी सी दिखाते है।





और ये रोबोट रेस्टौरेंट चूँकि shinjuku में ही था और हमारे होटेल से बस दो मिनट की दूरी पर था तो शाम को इसे देखने का प्रोग्राम बनाया गया। इस रोबोट cabaret के चार शो होते है और हर शो हाउस फ़ुल होता है इसलिए advance में टिकट लेना बेहतर होता है । इसलिए हम लोगों ने भी रात नौ बजे के शो को देखने के लिए 4200₹ का टिकट लिया और टिकट देते समय काउंटर वाले ने कहा कि आधे घंटे पहले आ जाइएगा । तो हम लोग साढ़े आठ बजे वहाँ पहुँच गए ।



अंदर ख़ूब ज़ोर का म्यूज़िक बज रहा था एक तरफ़ बार था और कुछ टेबल और chairs और सोफ़े थे जिन पर लोग बैठे थे और waitress जापानी राइस वाइन Sake वग़ैरा serve कर रही थीं और एक छोटा सा स्टेज था जहाँ मास्क पहनकर लोग नाच और गा रहे थे। जिसे देख कर एक बार को लगा की क्या यही रोबोट caberet है ।बाद में समझ आया की ये waiting lounge है। :)



ख़ैर तभी वहाँ अनाउन्स्मेंट हुआ की सभी लोग सीढ़ियों से बेस्मेंट की ओर जाए और जितने लोग वहाँ थे सभी लोग सीढ़ी से नीचे उतरने लगे । एक फ़्लोर उतरने के बाद पता चला की एक और फ़्लोर उतरना है जब बेस्मेंट के दूसरे फ़्लोर पर पहुँचे तो ऐरो का साइन नीचे जाने वाली सीढ़ी की तरफ़ दिखा रहा था । और हम लोग एक और फ़्लोर ये सोचते हुए उतर गए की अब तो पहुँच ही जाएँगे पर नहीं वहाँ से एक और फ़्लोर नीचे जाने का रास्ता दिखाने के लिए रेस्टौरेंट के लड़के लड़कियाँ खड़े थे ।



ख़ैर बेस्मेंट में चार फ़्लोर नीचे उतरने के बाद जब हम लोग पहुँचे तो वहाँ पॉप्कॉर्न, कोल्ड ड्रिंक, sake और banto बॉक्स में जापानी meal और टी शर्ट वग़ैरा बिक रहा था।और हम लोग सोच रहे थे की इतनी छोटी सी जगह पर कैसे रोबोट डान्स करेंगे।पर एक बात की तारीफ़ करनी होगी की यहाँ पर सुरक्षा के काफ़ी अच्छे इंतज़ाम रखते है । जहाँ पर दर्शकों के बैठने की जगह होती है उसके सामने बक़ायदा लोहे की ज़ंजीर लगा कर और सबसे आगे बैठने वालों को सचेत भी करते है की जब कोई रोबोट आपकी तरफ़ आए तो आप पीछे की तरफ़ हो जाइए ।



इस हॉल में दोनो तरफ़ बैठने के लिए सीट थी हम लोग भी अपनी सीट पर बैठ गए और शो शुरू होने का इंतज़ार करने लगे। इस दौरान रेस्टौरेंट के वेटर और वेट्रेस घूम घूम कर ज़ोर ज़ोर से आवाज़ लगाते रहते है की खाने पीने की चीज़ें जल्दी से ख़रीद ले क्यूँकि शो शुरू होने वाला है । वैसे इस दो घंटे के शो में तीन ब्रेक या interval होते है और इस दौरान फिर से खाने पीने की ट्राली आती है जिससे लोग चाहे तो ख़रीद सकते है।





दस मिनट के बाद शो शुरू हुआ और ख़ूब लाउड म्यूज़िक के साथ रंग बिरंगे कपड़ों और flashy लाइट्स के साथ नाचते गाते धूम मचाते हुए dancers ने शो शुरू किया । इसमें बहुत सारे किरदार दिखते है जैसे ninja turtle,dianasour ,robots ,जापानी बिल्ली जिसे ये लोग Neko कहते है । इसके अलावा इस डान्स शो में एक स्टोरी भी होती है जिसे पहले इंग्लिश में बताते है और फिर डान्स होता है । और ये एक तरह से बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती है।





इस शो में एक अपने इंडिया की भी झलक मिलती है और इसमें एक उड़ता हुआ तोते जैसा दिखाते है और ज़ोर ज़ोर से इंडिया इंडिया बोलते है ।





शो के आख़िरी में सभी को दो -दो फ़्लैश लाइट्स दी जाती है ताकि आख़िरी डान्स के दौरान सभी लोग इन लाइट्स को म्यूज़िक के साथ wave करे। और डान्स ख़त्म होते ही लाइट्स वापिस ले लेते है।




इस शो में म्यूज़िक,लाइट और साउंड इतना अधिक तेज़ होता है कि कई बार अजीब सा भी फ़ील होने लगता है। पर फिर भी इस शो को देखने का अपना ही मज़ा है । :)


Tuesday, July 18, 2017



Meiji jingu shrine देखने के बाद हम लोगों ने gyoen national गार्डन देखने की सोची और चूँकि Meiji shrine के पास ही ये गार्डन है तो हम लोगों ने एक बार फिर वॉक करना शुरू किया पर एक बार फिर हम लोग रास्ता भटक गए जबकि GPS दिखा रहा था की गार्डन आस पास ही है । ख़ैर फिर हम लोग एक आदमी से रास्ता पूछ ही रहे थे और वो हमें रास्ता बता रहा था कि तभी पास से गुज़रती हुई एक लड़की ने हम लोगों की बात सुनकर कहा कि वो उस तरफ़ ही जा रही है और वो हम लोगों को गार्डन तक छोड़ देगी । एक अच्छी बात ये थी की वो लड़की जिसका नाम yuki था इंग्लिश बोलती और समझती थी और इस तरह उससे बात करते हुए हम लोग गार्डन पहुँच गए । :)



हम लोगों ने sendagaya गेट से २०० yen का टिकट लेकर गार्डन में प्रवेश किया । यह गार्डन तक़रीबन साढ़े तीन किलो मीटर तक फैला हुआ है और इस गार्डन में चार अलग तरह के गार्डन देखे जा सकते है जैसे French formal garden, English landscape garden, Japanese traditional garden और Mother and child forest । इसके अलावा छोटे बड़े ponds और ब्रिजेज़ भी है।





gyoen गार्डन में एक छोटी सी कॉफ़ी शॉप भी है जहाँ कुछ जापानी बिस्कुट और chocolate और rice crackers भी मिलते है । इस शॉप से क़रीब दो सौ मीटर की दूरी पर एक पारम्परिक जापानी Rakuutei tea house है जहाँ बैठकर जापानी ग्रीन टी और जापानी स्वीट का आनंद लिया जा सकता है। अब जापान जाए और पारम्परिक टी हाउस में ना जाए ऐसा कैसे हो सकता है।





इस tea house में प्रवेश के लिए घर के बाहर लगी वेण्डिंग मशीन से ७०० yen का एंट्री टिकट लेना पड़ता है और घर के अंदर मौजूद जापानी महिला को वो टिकट देना होता है। फिर वो जापानी महिला पहले उनकी पारम्परिक स्वीट या मिठाई लाती है और फिर एक बाउल में ग्रीन टी सर्व करती है और बिलकुल जापानी स्टाइल में हर बार सर्व करने के पहले और बाद में सिर झुककर अभिनंदन करती है।



जापानी स्वीट तो अच्छी थी कुछ कुछ आटे के हलवे जैसी पर ग्रीन टी बहुत ही ज़्यादा कड़वी थी तो हम ने बस एक दो घूँट ही पिए क्यूँकि और हमसे पिया नहीं गया । :)





वैसे इस घर में सब लोग बड़े धीरे धीरे मतलब फुसफुसाकर बात करते है । ख़ैर इसका भी अपना ही मज़ा है । क़रीब १५-२० मिनट तक रहे और फिर हम लोग tea house से बाहर आए और गार्डन का चक्कर लगाते हुए वापिस अपने होटेल आ गए । :)



Monday, July 10, 2017

डेढ़ घंटे की बस यात्रा के बाद हम लोग अपने होटेल gracery पहुँचे । ये होटेल Godzilla head के लिए जाना जाता है। इस होटेल की आठवीं मंज़िल पर godzilla head बना हुआ है और ये सड़क से भी दिखाई देता है । होटेल में रुकने वाले terrace पर जाकर इसे देख सकते है और होटेल के कुछ कमरों से भी Godzilla head दिखाई देता है । ख़ैर हमने भी कुछ फ़ोटो खींची इस की । :)



अगले दिन हम लोगों ने Meiji jingu shrine देखने की सोची और चूँकि आजकल GPS का ज़माना है और हमारे होटेल से इस shrine की दूरी महज़ डेढ़ दो कि.मी . दिख रही थी तो हम लोगों ने वॉक करना शुरू किया पर फिर हम लोग थोड़ा रास्ता भटक गए और भाषा की समस्या के कारण रास्ता ढूँढने में भी दिक़्क़त आ रही थी तो हम लोगों ने टैक्सी ली और Meiji shrine पहुँच गए। वैसे यहाँ जाने के लिए harajuku स्टेशन पर उतरना पड़ता है।और yoyogi स्टेशन से भी यहाँ पहुँचा जा सकता है। इस shrine के कई गेट है ।







Meiji shrine जो की shibuya में है वहाँ के राजा Meiji और रानी shoken को समर्पित है जैसे ही shrine के area में पहुँचते है सबसे पहले torii गेट आता है और इस तरह के torii गेट हर shrine में दिखाई देते है ।यहाँ से आगे काफ़ी हरा भरा सा रास्ता shrine तक जाता है । shrine पर पहुँच कर सबसे पहले हाथ धोने पड़ते है उसके बाद shrine में जाते है ।shrine के अंदर दो कपूर के पेड़ है जो की एक डोरी से बँधे है और इन पेड़ों को पति- पत्नी के प्रतीक के रूप में माना जाता है।





ये shrine 1920 में बनाई गयी थी राजा Meiji की याद में क्यूँकि इस राजा के समय ही जापान ने बहुत तरक़्क़ी की थी । इस shrine में सुंदर गार्डन ,treasure house और museum भी है और हर जगह 500 yen का टिकट होता है । Meiji shrine में जापान के अमीर लोग पारम्परिक शिन्तो स्टाइल में शादी करने आते है। एक नवम्बर से तीन नवम्बर इस shrine और इसके पार्क में जापानी लोग बहुत अधिक संख्या में आते है क्यूँकि तीन नवम्बर इनके राजा Meiji का जन्मदिन होता है ।



यहाँ पर कोई समाधि जैसी चीज़ नहीं है पर राजा और रानी की आत्मा है ऐसा मानते है। यहाँ पर दानपात्र में सिक्के को उछाल कर डालते है और तीन बार ताली बजाकर हाथ जोड़ते है और जापानी स्टाइल में सिर झुकाकर रिस्पेक्ट दिखाते है।यहाँ पर श्राइन के एक साइड में लोग अपने संदेश और मन्नत लिख कर लगाते है ।





यहाँ से बाहर निकलने पर दो-तीन दुकाने पड़ती है जहाँ से good luck charm ,जिन्हें Omamori कहते है और dolls जैसी चीज़ें ख़रीदी जा सकती है। गुडलक charm यहाँ बहुत तरह के और अलग अलग रंगो के मिलते है जैसे पढ़ाई के लिए,अच्छी सेहत के लिए, धन के लिए, अच्छी क़िस्मत के लिए,परीक्षा के लिए,परिवार के लिए इत्यादि ।



यहाँ पर ही Omikuji fortune telling poetry के बारे में जान सकते है । यहाँ दो -तीन तरह के एक इंग्लिश और एक जापानी में लिखे लम्बे बॉक्स होते है जिनमें स्टिक्स होती है जिसे हिलाने पर एक स्टिक बाहर आती है जिन पर नम्बर लिखे होते है और उस नम्बर को जब दुकान पर बैठी लड़की को देते है तो वो एक काग़ज़ की स्लिप जैसी देती है जिसपर कुछ कविता सी लिखी होती है जिसे कुछ yen (जापानी करेन्सी) देकर ख़रीदा जा सकता है ।



Tuesday, July 4, 2017

इस साल हम लोग मई में जापान और चीन घूमने गए थे तो सोचा वहाँ के अपने अनुभव आप लोगों के साथ बाटूँ । तो पहले हम जापान की बातों को साझा करेंगे । वैसे जापान जाने से पहले हम ने कुछ जापानी शब्द जो आम बोलचाल की भाषा में इस्तेमाल होते है उन्हें सीखा भी जैसे थैंक यू को जापानी में arigato कहते है और हेलो को konnichiwa और सॉरी को gomennasai और ऐसे ही कुछ और शब्द ,जिससे एक बिलकुल ही नए देश जहाँ की भाषा ना हम समझते है और ना वो लोग हमारी भाषा ,ताकि वहाँ ज़्यादा परेशानी ना हो , हालाँकि कुछ लोग इंग्लिश समझ जाते है पर उसके लिए बहुत ही धीरे धीरे एक एक शब्द को बोलना पड़ता है । :)

 
(ये फ़ोटो प्लेन से ली है )
वैसे जापानी लोग बहुत ही ख़ुशदिल,मददगार होते है अगर उनसे कहीं का पता या रास्ता पूछिए तो अगर जगह आस पास है तो वो वहाँ तक आपके साथ चलकर दिखाते है पर जो लोग सिर्फ़ जापानी समझते है उनके साथ कभी कभी उनको अपनी बात समझने में दिक़्क़त आती थी ।वैसे कुछ दुकानदार इंग्लिश समझ लेते है और कहीं का भी रास्ता या पता किसी दुकानदार से पूछना ही बेहतर होता है ।


(टोक्यो airport)
टोक्यो airport से टोक्यो शहर तक़रीबन 30 से 35 कि.मी. दूर है और airport से टोक्यो सिटी जाने के दो- तीन options है जैसे लेमोज़िन बसें, मेट्रो और टैक्सी । मेट्रो में अगर आपको पता ना हो तो बहुत कन्फ़्यूज़न हो जाता है और टैक्सी बहुत महँगी पड़ती है। पर उनकी लेमोज़िन बसें बहुत ही अच्छी ,आरामदायक और बिलकुल punctual होती है और डेढ़ घंटे में पहुँचा देती है ।


(टोक्यो शहर की झलक )
टोक्यो जाने के पहले हम लोगों ने काफ़ी रीसर्च किया था कि टोक्यो airport से अपने होटेल gracery जो कि shinjuku में था कैसे जाएँगे और सोचा था की उनकी मेट्रो लेंगे पर जब हम लोग टोक्यो पहुँचे तो सामने ही बस का काउंटर दिखा और हम लोगों ने बस का टिकट लिया और बस स्टॉप पर पहुँच गए क्यूँकि मेट्रो स्टेशन के लिए थोड़ा चलना था और लम्बी हवाई यात्रा के बाद इतनी एनर्जी नहीं थी इसलिए बस लेना बेहतर लगा। वहाँ पर हर काम इतना systematic तरीक़े से होता है कि बस कुछ पूछिए मत।


ख़ैर हम लोग अपने सामान के साथ जैसे ही बस स्टॉप पर पहुँचे तो वहाँ खड़े स्टाफ़ ने हमसे टिकट लिया और सामान पर स्लिप लगाई और जब बस आयी तो उन्होंने ही सारा सामान बस में चढ़ाया जिसकी हमें उम्मीद नहीं थी क्योंकि जब हम यूरोप घूमने गए थे तो वहाँ हर जगह बस में ख़ुद ही सामान चढ़ाना और उतारना पड़ता था । :(

जैसे ही बस चली तो एक आदमी प्लैकर्ड लेकर बस में चढ़ा जिस पर लिखा था की सीट बेल्ट लगा लीजिए ।और बस shinjuku के लिए चल पड़ी । :)














Friday, January 1, 2016

नव वर्ष २०१६ का आगाज हो चुका है इस अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई । बहुत लोग हर साल जब नव वर्ष आता है तो बहुत सारे वादे अपने आप से करते है पर जैसे जैसे समय बीतता है वो अपने से किये गये वादे भूलने लगते है । बहुत कम या यूँ कहे कि विरले ही होते है जो अपने आप से किये कुछ वादे पूरे कर पाते है ।

हम भी पिछले दो सालो से हर नये साल मे यह सोचते थे कि हम वापिस अपने blog पर लिखना शुरू करेगे पर हर बार बस सोच-विचार कर ही रह जाते थे । इसलिये इस साल हमने कुछ भी प्लान नहीं किया है पर हाँ मन में ये विचार ज़रूर है कि इस बार हम blog लिखना नहीं छोड़ेंगे । अब देखना है कि हम इस पर कितना क़ायम रह पाते है । :)

तो इसी बात पर आप सबको नये साल की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें ।

Thursday, December 17, 2015

३ साल पहले १६ दिसमबर के दिन जो वीभतस घटना हुई थी जिसमें निरभया (जिसका असली नाम जयोती सिंह है ) की मृत्यु हो गई थी ,पर कया आज ३ साल बाद कुछ भी बदला है । ये लिखते हुये बेहद अफ़सोस हो रहा है कि आज भी हालात में बहुत ज़्यादा फ़र्क़ नहीं हुआ बल्कि हालात ख़राब ही हुये है ।

इस वीभतस घटना के बाद ऐसा लग रहा था कि जूवीनाईल क़ानून में कुछ बदलाव किया जायेगा पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ । ना तो सरकार ना ही उचच न्यायालय ना ही उच्चतम न्यायालय ने इस के लिये कुछ किया । जबकि देश का क़ानून ऐसा होना चाहिये कि अपराधी भले ही नाबालिग़ क्यों ना हो सजा तो उसे भी वही होनी चाहिये जो एक निर्मम अपराधी की होती है । जब वो अपराध करता है तो सजा का भी हक़दार है । हमारे देश का क़ानून कहता है कि भले ही गुनहगार छूट जाये पर किसी बेगुनाह को सजा नहीं होनी चाहिये पर इस केस में तो गुनहगार सामने था पर सिर्फ़ इसलिये कि वो नाबालिग़ था उसे सिर्फ़ ३ साल की सजा दी गई जो कि ठीक नहीं था । जब अपराध करते हुये उसने सबसे अधिक निर्ममता दिखाई तो फिर उसे जुवीनाईल कहकर कम सजा देना बहुत बड़ी ग़लती है ।

अब जब वो जेल से छूटने वाला है तो वो किसी की निगरानी में नहीं रहना चाहता है । अब वो अपने साथ हुये अत्याचार के बारे में बताकर कि बचपन से उसका शोषण हुआ है इसलिये वो ऐसा अपराधी बन गया । पर क्या उसका ये कहना उसके इस अपराध को कम कर देताहै ?

उस माँ- बाप और उस परिवार की पीड़ा जिसने अपनी बेटी इन लोगो के वहशीपन कारण खोई है जो आज भी सिर्फ़ न्याय के लिये लड़ रहे है । और उनका ये कहना बिलकुल ग़लत नहीं है कि इसकी क्या गारण्टी कि ये नाबालिग़ जो अब बालिग़ हो गया है वो अब दोबारा ऐसा अपराध नहीं करेगा ।इस तरह के अपराधी में मानसिकता और सोच विकृत और ख़राब होती है ।

आज भी दिल्ली में वही हाल है ,दिल्ली सरकार या केन्द्र सरकार या फिर पुलिस चाहे कितने दम भर ले कि अब महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के मामले कम हुये है पर ऐसा बिलकुल भी नहीं है हर रोज़ न्यूज़ चैनल हो या फिर अख़बार उनमें आज भी मासूम लड़कियों के साथ इस तरह के जघनय अपराध होने के समाचार होते है ।

जब तक देश का कानून सखत नही होगा , तब तक क़ानून का डर ऐसे लोगों के दिल में नहीं होगा क्योंकि उन्हे मालूम है कि वो ऐसा निर्मम अपराध करके भी बच सकते है । इसलिये क़ानून और सजा को सख़्त करने की ज़रूरत है ।










Friday, December 11, 2015

कुछ दिन पहले लिखी पोस्ट में जैसा कि हमने कहा था कि ३० नवम्बर के टाइम्स लिटफेस्ट के बारे में लिखेंगे तो लीजिये हम अपने वादे के मुताबिक ३० तारीख के सेशन के बारे में लिख रहे है । पर थोड़ी देर से लिख रहे है । :)

इस दिन बहुत जल्दी करने के बाद भी हम करीब १२ बजे के आस -पास पहुंचे जिसका हमें काफी अफ़सोस था क्यूंकि सुबह का सेशन जगदीश भगवती का था , और ये सेशन ११.३० बजे ख़त्म होना था और साढ़े ग्यारह बजे से रवीश कुमार और विनीत कुमार की दिल्ली की प्रेम कहानियाँ पर सेशन होना था जो हमें लग रहा था की हमसे छूट जायेगा पर खैर चूँकि शायद जगदीश भगवती जी का सेशन देर से ख़त्म हुआ तो रवीश जी का पूरा सेशन देखने को मिला।

इस किताब में रवीश जी और विनीत कुमार ने जो रोज के जीवन में बस और मेट्रो में लड़के-लड़की की बात चीत ,इश्क और प्यार को बखूबी और बहुत ही रोचक अंदाज़ में लिखा है। उन दोनों ने अपनी किताब से कुछ बहुत ही दिलचस्प और छोटी -छोटी सी प्रेम कहानियां पदक कर सुनाई. इस किताब में सभी कहानियों को बड़े ही रोचक कार्टून की मदद से दिखाया गया है।जिसे विक्रम ने बनाया है । संक्षेप में ये एक छोटी,अच्छी,रोचक और दिलचस्प किताब है जिसे पढ़ते हुए आप बोर नहीं होंगे. हालंकि इसकी कीमत बहुत कम है ।इस सेशन के अंत में भी सवाल जवाब हुए जिसमे एक लड़के ने पुछा की वो बिहार का है और चूँकि दिल्ली की लडकियां हाइट में लम्बी होती हैउससे उन्हें काम्प्लेक्स हो जाता है तो इसका जवाब उन्होंने दिया की दिल्ली में हर जगह से लडकियां आती है मतलब हर प्रदेश से पर यहाँ आकर सब उन्हें दिल्ली वाली लड़कियां कहते है.

सेशन ख़त्म होते ही हम फुल सर्कल यानी बुक शॉप पर गए तो वहां पर सिर्फ एक ही किताब बची थी खैर हमने रवीश जी
की किताब खरीदी और उस पर उनके हस्ताक्षर भी कराये और उसी समय हमने उन्हें अपना परिचय भी दिया पर वहां
इतनी भीड़ थी की ज्यादा बात नहीं हो पाई।


इसके बाद हम लोग गुरशरण दास और शुभाशीष गंगोपाध्या वाला सेशन देखा जिसमे उन्होंने एक माउस मर्चेंट की कहानी सुनाई कि कैसे एक लड़के ने अपने गाँव के सबसे अमीर आदमी से एक मरे हुए चूहे को माँगा और किस तरह उस मरे हुए चूहे को उसने एक औरत जिसके पास बिल्ली थी उसे बेचा और उस औरत ने उसे पैसे दिए जिससे उसने कुछ चना और पानी लिया और किस तरह उस चने और पानी बेचकर अपना बिसिनेस एम्पायर खड़ा किया और किस तरह वो सबसे अमीर आदमी बन गया और फिर एक दिन उसने एक सोने का चूहा बनवाया और उसे लेकर गाँव के उस सबसे अमीर आदमी के पास गया और उससे दिया तब उस अमीर आदमी ने उसे वो सोने का चूहा वापिस करते हुए उससे उसके अमीर बनने की सारी बातें सुनी और फिर उससे अपनी बेटी की शादी कर दी. किताब ख़रीदने के बाद देखा कि उसके लेखक गुरशरण दास नहीं बल्कि अरशिया सतार है। दास साब ने सिर्फ़ introduction लिखा था । :(

इसके बाद उर्दू लेखन पर सैफ महमूद का सेशन देखा जिसमे उन्होंने उर्दू के शायरों और शायरी के बारे में बहुत कुछ
बताया और किस तरह उर्दू भाषा ख़त्म हो रही है और सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए और किस तरह उर्दू भाषा में लिखने वालो की कमी होती जा रही है ,पर पूछने पर की उर्दू अकादमी को क्या कुछ नहीं करना चाहिए तो उन्होंनेजवाब दिया की उर्दू अकादमी से इस तरह की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए ।

इसके बाद शोभा डे ,पद्मा देसाई भगवती और नीलांजना रॉय का सेशन जो( modern women as public enemy no.1) पर था उसमे काफी रोचक बातचीत हुई और पद्मा देसाई ने अपनी पहली शादी और और फिर उसका टूटना और फिर किस तरह वो जगदीश भगवती से मिली और उनसे शादी हुई। उनका कहना था की मॉडर्न का मतलब आत्मनिर्भर होना है। ;शोभा डे ने बताया की हमारे यहाँ पहनावे से लोग स्त्री मॉडर्न मानते है उन्होंने ने कहा कि पहले दिन वो साड़ी पहनकर आई थी तो सबने उन्हें नमस्कार करके स्वागत किया था पर आज चूँकि वो वेस्टर्न कपड़ों में थी तो सबने उन्हें हैलो मैम और गुड इवनिंग मैम कहकर सम्बोधित किया । :)

इस सेशन के बाद ( cutting cancer down the size) में डॉ. माहेश्वरी , प्रिया दत्त , मनीषा कोइराला ,डा ़भावना सिरोही,और हरमाला गुप्ता की बातें जागरूक करने वाली थी । जैसे कि केयर गिवर (care giver) किस तरह कैंसर के मरीज़ को इमोशनल सपोर्ट दे सकते है । परिवार और दोस्त कितने अहम होते है़ । डा़ सिरोही ने बताया कि नियमित चेक अप कराते रहना चाहिये ।योगा ,व्यायाम और सही डाइट से शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ और मज़बूत होते है । इसी सेशन में प्रिया दत्त ने बताया कि वो बोन मैरो बैक शुरू कर रही है जो कि बहुत अच्छा है । इस सेशन की सबसे मज़ेदार बात थी कि इस का आयोजन रजनीगंधा ने किया था । :)

इसके बाद का सेशन सलमान ख़ुर्शीद का था पर उसे हम पूरा देख नहीं पाये । इसके बाद भी एक और सेशन था पर चूँकि तब तक हम थक गये थे इसलिये हम घर लौट आये । :( :)