सांप और सपेरा

तक़रीबन चालीस साल बाद हमने सपेरा देखा और वो भी दिल्ली में। दरअसल पिछले हफ़्ते हम सपरिवार पंडारा रोड के गुलाटी रेस्टौरेंट में लंच खाने गए थे । रेस्टौरेंट जाते समय हमने सपेरा देखा जिसने अपने पास दो टोकरी रखी हुई थी । उस समय तो हम नहीं रुके और हम लोग खाना खाने चले गए ।

जब खाना खाकर निकले तो देखा की सपेरा बीन बजा रहा है और सांप उसकी बीन पर झूम सा रहा है । अब इतने सालों बाद सांप को बीन की धुन पर झूमते देख हमसे रहा नहीं गया और हम भी पहुँच गए सांप देखने । वहाँ सपेरे ने एक विदेशी महिला के गले में सांप को डाला हुआ था । बहादुर महिला थी । :)

हम सभी ने बचपन में सांप और नेवले की लड़ाई , बंदर और भालू का नाच ज़रूर देखा होगा । और उसी की याद करके हम भी सांप का नाच देखने लगे ।

बाद में सपेरे ने हमसे कहा की अगर हम चाहे तो सांप को हाथ में ले सकते है पर हमारी हिम्मत नहीं हुई । भाई सांप तो आख़िर सांप ही है । :)

जिज्ञासावश हमने सपेरे से पूछा कि पहले तो हमने कभी उसे वहाँ नहीं देखा है तो उसने कहा की वो तो पिछले पचीस सालों से वहाँ बैठता है । हो सकता है जिस दिन हम पंडारा रोड गए हो उस दिन वो ना आया हो । और हमारे पूछने पर कि इससे कितने कमाई होती है इस पर उसने कहा की परिवार के खाने पीने का इंतज़ाम हो जाता है ।

ख़ैर हमने भी उसे सौ रुपए दिए और धन्यवाद कह कर चल दिए ।












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