Times Litfest Delhi

टाईम्स ऑफ इंडिया  लिटफेस्ट  दिल्ली २८,२९,३० नवंम्बर को मेडन  होटल ,७ शाम नाथ मार्ग  में आयोजित  किया गया था  , २९ और ३० नवम्बर को हम भी गए थे , वहां पांच अलग -अलग  जगहों पर सुबह १० बजे से शाम ८बजे तक सेशन चलते रहते थे नौर हर सेशन के ख़त्म होने के १० मिनट पहले या यूँ कह  ले कि सेशन के आखिर में जनता  गेस्ट  पैनल से सवाल पूछ सकती थी.  आयोजकों की तारीफ़ करनी होगी की वो किसी भी  गेस्ट को निर्धारित समय से ज्यादा नहीं बोलने  थे  और अगर कोई जरा ज्यादा समय लेता था तो पहले तो वो एक स्लिप देते  तब भी सेशन ख़त्म नहीं होता था तो बजर  बजा देते थे।   :)

२९ को हमने ३-४ सेशन देखे।  सबसे पहले शोभा डे  और सुनील खिलनानी , पैट्रिक फ़्रेंच  और सिद्धार्थ वरदराजन  का सेशन देखा।
  उसके बाद देवदत्त पटनायक और  दिलीप  पडगाओंकर  के बीच का सेशन बहुत ही रोचक और अच्छा था जिसमे  देवदत्त ने माया के ऊपर एक बहुत ही रोचक किस्सा सुनाया  कि एक बार एक गुरु अपने शिष्यों के साथ जंगल से आ रहे थे तभी एक हाथी सामने आ  गया तो गुरु जी  दौड़े तो उनके पीछे उनके शिष्य भी दौड़ने लगे , गुरु जी दौड़कर  सुरक्षित स्थान पर पहुँच  कर रुक गए  तो उनके शिष्य भी रुक गए और उन्होंने गुरु जी से पुछा की आप हाथी देख कर भागे क्यों तो गुरु जी ने कहा कि  हाथी का आना भी माया था और हमारा वहां से भागना भी माया था।   :)

इसी तरह की और भी बहुत सारी दिलचस्प बातें बताई।
इसके बाद जयराम रमेश अरुण मायरा ,और स्वामीनाथन अइयर के बीच नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के बारे में
कुछ बातें हुई जैसे कि  नरसिम्हा  राव की सरकार के समय जब रिफार्म  किये गए तब उन्होंने मनमोहन सिंह से कहा कि अगर  कुछ भी गड़बड़ हुई तो उसकी जिम्मेदारी मनमोहन सिंह की और अगर सफल हुआ तो उसका क्रेडिट नरसिम्हा राव को जाएगा  .

इसके बाद शाम को शेखर गुप्ता, रवीश कुमार  ,रेघा झा, और नलिन मेहता के बीच  (is mass media dying . पत्रकारिता का भविष्य ) बात भी काफी दिलचस्प थी , जिसमे रवीश जी ने बताया कि चूँकि वो खुद न्यूज़ कम  देखते है
और  सेशन में आने के लिए उन्होंने जब न्यूज़ कुछ चैनल देखे  तो  प्राइम टाइम  में उनमे से ज्यादातर भूत प्रेत वगैरा के बारे में ही दिखा रहे थे. और किस  तरह  न्यूज़ चैनल का  स्तर नीचे हो रहा है. इसके बाद सवाल जवाब शुरू हुए  और हमने भी एक सवाल पुछा कि  न्यूज़ चैनल  का स्तर गिर रहा है और ऐसी न्यूज़ से यंग जनरेशन पर खराब असर पड़ता है तो रवीश जी ने कहा  की आप न्यूज़ मत देखिये।   :) हालाँकि हमें उनसे  इस तरह के जवाब की उम्मीद नहीं थी  क्यूंकि न्यूज़ चैनल आजकल न्यूज़ कम दिखाते है.
इसी सेशन में ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए रवीश जी ने बड़ी ही मजेदार बात कही की ब्रेकिंग न्यूज़ की जगह वीयूंग न्यूज़ होना चाहिए।

इसी सेशन में एक लड़के ने रवीश जी से पुछा कि  आपने   अपने ब्लॉग के आखिर में ये क्यों लिखा है कि सब कुछ बनना बस रवीश कुमार मत बनना. तो रवीश जी ने जवाब दिया कि  भले ही आप किसी को  फॉलो करो पर blindly फॉलो मत करो     जो सही भी है.
इसी तरह की बातों के बीच सेशन खत्म हुआ और हम भी वापिस घर को चल दिए :)

बड़े दिन बाद पोस्ट लिखी है और कुछ लम्बी भी हो गयी इसलिए ३० तारिख के सेशन के बारे में कल लिखेंगे।  :)




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