Friday, December 11, 2015

Times litfest delhi -2

कुछ दिन पहले लिखी पोस्ट में जैसा कि हमने कहा था कि ३० नवम्बर के टाइम्स लिटफेस्ट के बारे में लिखेंगे तो लीजिये हम अपने वादे के मुताबिक ३० तारीख के सेशन के बारे में लिख रहे है । पर थोड़ी देर से लिख रहे है । :)

इस दिन बहुत जल्दी करने के बाद भी हम करीब १२ बजे के आस -पास पहुंचे जिसका हमें काफी अफ़सोस था क्यूंकि सुबह का सेशन जगदीश भगवती का था , और ये सेशन ११.३० बजे ख़त्म होना था और साढ़े ग्यारह बजे से रवीश कुमार और विनीत कुमार की दिल्ली की प्रेम कहानियाँ पर सेशन होना था जो हमें लग रहा था की हमसे छूट जायेगा पर खैर चूँकि शायद जगदीश भगवती जी का सेशन देर से ख़त्म हुआ तो रवीश जी का पूरा सेशन देखने को मिला।

इस किताब में रवीश जी और विनीत कुमार ने जो रोज के जीवन में बस और मेट्रो में लड़के-लड़की की बात चीत ,इश्क और प्यार को बखूबी और बहुत ही रोचक अंदाज़ में लिखा है। उन दोनों ने अपनी किताब से कुछ बहुत ही दिलचस्प और छोटी -छोटी सी प्रेम कहानियां पदक कर सुनाई. इस किताब में सभी कहानियों को बड़े ही रोचक कार्टून की मदद से दिखाया गया है।जिसे विक्रम ने बनाया है । संक्षेप में ये एक छोटी,अच्छी,रोचक और दिलचस्प किताब है जिसे पढ़ते हुए आप बोर नहीं होंगे. हालंकि इसकी कीमत बहुत कम है ।इस सेशन के अंत में भी सवाल जवाब हुए जिसमे एक लड़के ने पुछा की वो बिहार का है और चूँकि दिल्ली की लडकियां हाइट में लम्बी होती हैउससे उन्हें काम्प्लेक्स हो जाता है तो इसका जवाब उन्होंने दिया की दिल्ली में हर जगह से लडकियां आती है मतलब हर प्रदेश से पर यहाँ आकर सब उन्हें दिल्ली वाली लड़कियां कहते है.

सेशन ख़त्म होते ही हम फुल सर्कल यानी बुक शॉप पर गए तो वहां पर सिर्फ एक ही किताब बची थी खैर हमने रवीश जी
की किताब खरीदी और उस पर उनके हस्ताक्षर भी कराये और उसी समय हमने उन्हें अपना परिचय भी दिया पर वहां
इतनी भीड़ थी की ज्यादा बात नहीं हो पाई।


इसके बाद हम लोग गुरशरण दास और शुभाशीष गंगोपाध्या वाला सेशन देखा जिसमे उन्होंने एक माउस मर्चेंट की कहानी सुनाई कि कैसे एक लड़के ने अपने गाँव के सबसे अमीर आदमी से एक मरे हुए चूहे को माँगा और किस तरह उस मरे हुए चूहे को उसने एक औरत जिसके पास बिल्ली थी उसे बेचा और उस औरत ने उसे पैसे दिए जिससे उसने कुछ चना और पानी लिया और किस तरह उस चने और पानी बेचकर अपना बिसिनेस एम्पायर खड़ा किया और किस तरह वो सबसे अमीर आदमी बन गया और फिर एक दिन उसने एक सोने का चूहा बनवाया और उसे लेकर गाँव के उस सबसे अमीर आदमी के पास गया और उससे दिया तब उस अमीर आदमी ने उसे वो सोने का चूहा वापिस करते हुए उससे उसके अमीर बनने की सारी बातें सुनी और फिर उससे अपनी बेटी की शादी कर दी. किताब ख़रीदने के बाद देखा कि उसके लेखक गुरशरण दास नहीं बल्कि अरशिया सतार है। दास साब ने सिर्फ़ introduction लिखा था । :(

इसके बाद उर्दू लेखन पर सैफ महमूद का सेशन देखा जिसमे उन्होंने उर्दू के शायरों और शायरी के बारे में बहुत कुछ
बताया और किस तरह उर्दू भाषा ख़त्म हो रही है और सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए और किस तरह उर्दू भाषा में लिखने वालो की कमी होती जा रही है ,पर पूछने पर की उर्दू अकादमी को क्या कुछ नहीं करना चाहिए तो उन्होंनेजवाब दिया की उर्दू अकादमी से इस तरह की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए ।

इसके बाद शोभा डे ,पद्मा देसाई भगवती और नीलांजना रॉय का सेशन जो( modern women as public enemy no.1) पर था उसमे काफी रोचक बातचीत हुई और पद्मा देसाई ने अपनी पहली शादी और और फिर उसका टूटना और फिर किस तरह वो जगदीश भगवती से मिली और उनसे शादी हुई। उनका कहना था की मॉडर्न का मतलब आत्मनिर्भर होना है। ;शोभा डे ने बताया की हमारे यहाँ पहनावे से लोग स्त्री मॉडर्न मानते है उन्होंने ने कहा कि पहले दिन वो साड़ी पहनकर आई थी तो सबने उन्हें नमस्कार करके स्वागत किया था पर आज चूँकि वो वेस्टर्न कपड़ों में थी तो सबने उन्हें हैलो मैम और गुड इवनिंग मैम कहकर सम्बोधित किया । :)

इस सेशन के बाद ( cutting cancer down the size) में डॉ. माहेश्वरी , प्रिया दत्त , मनीषा कोइराला ,डा ़भावना सिरोही,और हरमाला गुप्ता की बातें जागरूक करने वाली थी । जैसे कि केयर गिवर (care giver) किस तरह कैंसर के मरीज़ को इमोशनल सपोर्ट दे सकते है । परिवार और दोस्त कितने अहम होते है़ । डा़ सिरोही ने बताया कि नियमित चेक अप कराते रहना चाहिये ।योगा ,व्यायाम और सही डाइट से शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ और मज़बूत होते है । इसी सेशन में प्रिया दत्त ने बताया कि वो बोन मैरो बैक शुरू कर रही है जो कि बहुत अच्छा है । इस सेशन की सबसे मज़ेदार बात थी कि इस का आयोजन रजनीगंधा ने किया था । :)

इसके बाद का सेशन सलमान ख़ुर्शीद का था पर उसे हम पूरा देख नहीं पाये । इसके बाद भी एक और सेशन था पर चूँकि तब तक हम थक गये थे इसलिये हम घर लौट आये । :( :)




























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